औषिधि विज्ञान शास्त्र | Aushidhi Vigyan Shatstra

By: विश्वनाथ द्विवेदी - Vishwanath Dwivedi


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद और औषध विज्ञान के महत्व, विकास और शोध की चर्चा की गई है। आचार्य ने बताया है कि आयुर्वेद का विज्ञान केवल भारतीयों के लिए नहीं, बल्कि विश्व के वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। वर्तमान समय में औषध विज्ञान के साहित्य का समृद्ध होना आवश्यक है ताकि शोधकर्ताओं को आवश्यक सामग्री प्राप्त हो सके। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले कुछ सदियों में राजनीतिक और अन्य कारणों से आयुर्वेद की वैज्ञानिक धाराओं में कुछ रुकावटें आईं, फिर भी इसका प्रवाह जारी रहा। आयुर्वेद को समय-समय पर विभिन्न विचारों और साहित्य से समृद्ध किया गया है। इसके साथ ही, आयुर्वेद में औषधियों के गुण, उनके उपयोग और उनके आधार पर द्रव्यों की परिभाषा की गई है। पाठ में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद में द्रव्य का स्वरूप और उसका वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न वनस्पतियों के प्रकार, उनके गुण, उपयोग और औषधीय महत्व को समझाया गया है। इसके साथ ही, देश विज्ञान और भूपिविज्ञान के महत्व को भी रेखांकित किया गया है, जिसमें बताया गया है कि किस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में औषधियों की उत्पत्ति होती है और किस प्रकार की भूमि में किस प्रकार की वनस्पतियों का विकास होता है। अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि आयुर्वेद में द्रव्यों का ज्ञान न केवल औषधियों के लिए, बल्कि मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी आवश्यक है। यह पाठ आयुर्वेद के समृद्ध इतिहास, विकास और उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उजागर करता है।


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