पतंजलि महाभाष्य | mahabhasya Of Patanjali

By: पंडित काशीनाथ - Pandit Kashinath
पतंजलि महाभाष्य  | mahabhasya Of Patanjali by


दो शब्द :

इस पाठ में महाभाष्य और व्याकरण के महत्व पर चर्चा की गई है। यह महाभाष्य पतञ्जलि द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो संस्कृत व्याकरण पर आधारित है। पाठ में इस ग्रंथ के संपादन और अनुवाद की जानकारी दी गई है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि इसका हिंदी में अनुवाद प्रा. काशीनाथ शास्त्री अभ्यंकर के मार्गदर्शन में किया गया है। इस ग्रंथ का उद्देश्य व्याकरण के सिद्धांतों को स्पष्ट करना और संस्कृत भाषा के अध्ययन को सरल बनाना है। पाठ में यह भी बताया गया है कि महाभाष्य का महत्व न केवल भारतीय भाषाओं में है, बल्कि यह विश्व की भाषाई संरचना को समझने में भी सहायक है। पाठ में उन चुनौतियों का उल्लेख किया गया है, जिनका सामना संपादकों और अनुवादकों ने किया है, विशेषकर आर्थिक कठिनाइयों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण। इसके साथ ही, अनुवाद में विद्वानों की समीक्षाओं और सुझावों का भी स्वागत किया गया है, ताकि अनुवाद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। अंत में, पाठ में महाभाष्य के हिंदी अनुवाद के महत्व और इसकी व्यापकता पर जोर दिया गया है, जिससे यह व्याकरण का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए उपयोगी हो सके।


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