हिन्दू बनाम हिन्दू | Hindu Banam Hindu

By: राममनोहर लोहिया - Rammanohar Lohiya


दो शब्द :

डा. राम मनोहर लोहिया की कृति "इतिहास चक्र" में भारतीय समाज और धर्म के भीतर उदारवाद और कट्टरता के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष का विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में दिए गए लेखों में लोहिया ने हिन्दू धर्म के भीतर की दो धाराओं—उदारवाद और कट्टरता—के बीच के टकराव को स्पष्ट किया है। वे बताते हैं कि यह संघर्ष पिछले पांच हजार वर्षों से चला आ रहा है और इसके परिणामस्वरूप, हिन्दू धर्म में कई सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। लोहिया का कहना है कि हिन्दू धर्म में उदारवाद और कट्टरता का यह द्वंद्व केवल धार्मिक विश्वासों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न पहलुओं, जैसे वर्ण व्यवस्था, स्त्री की स्थिति, और सम्पत्ति के अधिकारों पर भी प्रभाव डालता है। वे विशेष रूप से वर्ण व्यवस्था की आलोचना करते हैं और बताते हैं कि यह व्यवस्था न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है, बल्कि इसके खिलाफ विद्रोह भी हुए हैं। इसके अतिरिक्त, लोहिया ने यह भी दर्शाया है कि हिन्दू धर्म में सहिष्णुता का गुण हमेशा ही रहा है, लेकिन यह सहिष्णुता कभी-कभी कट्टरता के खिलाफ एक ढाल के रूप में भी कार्य करती है। उन्होंने यह भी बताया कि हिन्दू धर्म में स्त्रियों की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है, और यह तभी संभव है जब उन्हें समान अधिकार दिए जाएं। इस प्रकार, लोहिया की यह कृति एक गहरे विश्लेषण के माध्यम से हिन्दू धर्म और भारतीय समाज की जटिलताओं को उजागर करती है, जिसमें उदारता और कट्टरता के बीच का संघर्ष प्रमुखता से शामिल है।


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