शिवा-तंत्र-रहस्य | shiva-tantra-rahasya

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दो शब्द :
"शिव-तंत्र रहस्य" पुस्तक में कश्मीर के अद्वैतवादी दर्शन की व्याख्या की गई है, जिसमें शिव की स्थिति, उसकी शक्तियाँ और उसका संबंध जगत से समझाया गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञा' और 'विमर्शिनी' पर आधारित है। कश्मीर के शैव दर्शन में शिव को केवल जगत का रचनाकार नहीं, बल्कि मोक्ष का साधन माना गया है। यहाँ का अद्वैतवादी दृष्टिकोण यह स्वीकार करता है कि देह ही शिव से साक्षात्कार का माध्यम है। शिव की इच्छा, ज्ञान, क्रिया और आनंद को उसकी शक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शिव का स्वभाव आनंदमय और शांति देने वाला है। जब शिव की इच्छा का स्पंदन होता है, तो वह अपनी पूर्व अवस्था से थोड़ा निम्न कोटि का बन जाता है। यह स्थिति राजा की भाँति होती है, जहाँ वह अपने क्षुद्र शरीर में असीम संवेदना को समाहित करता है। शिव की विभिन्न अवस्थाएँ जैसे 'सदाशिव', 'ईश्वर' और 'त्रिक' के माध्यम से उसकी शक्तियों और कार्यप्रणाली को समझाया गया है। 'सदाशिव' अवस्था में शिव ज्ञान और क्रिया की समानता में होता है, जबकि 'ईश्वर' अवस्था में उसकी क्रिया शक्ति प्रबल होती है। त्रिक प्रणाली में शिव, शक्ति और नर के बीच का संबंध दर्शाया गया है, जहाँ प्रत्येक तत्व की अपनी भूमिका होती है। कुल मिलाकर, इस पुस्तक में शिव की विभिन्न शक्तियों, उनकी अभिव्यक्ति और जगत के साथ उनके संबंध को गहराई से समझाने का प्रयास किया गया है। यह ज्ञान केवल पुस्तक के माध्यम से नहीं, बल्कि अनुभव और साधना के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
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