१२१ दिमागी कसरतें | 121 Dimagi Kasrate

- श्रेणी: कहानियाँ / Stories मानसिक शक्ति/ Mansik Shakti साहित्य / Literature
- लेखक: हरीश चन्द्र सन्सी - Harish Chander Sansi
- पृष्ठ : 164
- साइज: 58 MB
- वर्ष: 2004
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में विभिन्न स्थितियों और समस्याओं के माध्यम से गणितीय पहेलियों का वर्णन किया गया है। कहानी की शुरुआत एक कवि की पत्नी शीला से होती है, जो बस से घर लौटते समय अपने पति की प्रतीक्षा करती है। एक दिन शीला ने रिक्शा लिया और उसके बाद अपनी कार में सवार होकर घर पहुंच गई। पाठक से पूछा गया है कि उसने रिक्शे में कितनी देर यात्रा की। इसके बाद, सुरेश और सुजाता के बीच एक पैन की खरीददारी की चर्चा होती है, जिसमें सुरेश पहले पैन को पांच गुना कीमत पर और दूसरे पैन को दो गुना कीमत पर खरीदता है। पाठक से यह सवाल पूछा गया है कि दोनों पैन की कीमतें क्या थीं। पाठ में एक दीवाली के मौके पर ताश खेलने वाले लोगों की भीड़ का वर्णन है, जिसमें बिजली चली जाती है और मोमबत्तियों की रोशनी में गर्मी बढ़ जाती है। यह चर्चा होती है कि पंखों को चलाने पर मोमबत्तियां क्यों नहीं बुझी। इसके बाद, एक परीक्षा की स्थिति का विवरण है जिसमें एक छात्र को सत्यंवद् और मिध्यानाथ में से सत्य बोलने वाले की पहचान करनी होती है। कहानी में रवींद्र का प्लॉट खरीदने का किस्सा और उसके क्षेत्रफल की गणना भी शामिल है। इस पाठ में एक विदेशी एजेंटों के समूह का पर्दाफाश, उनके कार्य विधियों और देशद्रोह पर चर्चा की गई है। अंत में, पंडित चंद्रिकारमण और उनके परिवार की यात्रा का विवरण है, जिसमें राधिका अपने घोड़े पर सवार होकर जल्दी से अपने घर लौटने की कोशिश करता है। कुल मिलाकर, यह पाठ गणितीय समस्या समाधान, तर्क और तात्त्विक सोच को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्थितियों का उपयोग करता है। पाठ के अंत में पाठक से कई प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर देने के लिए उन्हें उपरोक्त घटनाओं के विवरण पर विचार करना होता है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.