पाशुपतास्त्र मंत्रvसाधना एवं सिद्धि | Pushupatastra mantra sadhna evam siddhi

By: श्री सुमित गिरधरवाल - Sumit Girdharwal


दो शब्द :

पशुपतास्त्र, नारायणास्त्र और ब्रह्मास्त्र, ये तीनों अस्त्र ब्रह्मांड में सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें से किसी एक अस्त्र की सिद्धि प्राप्त करना व्यक्ति के सभी कष्टों को समाप्त कर सकता है, लेकिन यह सिद्धि सरलता से प्राप्त नहीं होती। इसके लिए साधना और धैर्य की आवश्यकता होती है। पशुपतास्त्र मंत्र की साधना के लिए मंत्र का विनियोग और ध्यान विधि महत्वपूर्ण हैं। मंत्र का जप करने से पहले दीक्षा लेना आवश्यक है और इसके बाद लाखों जप करने का पुरश्चरण करना होता है। इस मंत्र का प्रभाव तब और बढ़ जाता है जब इसका पाठ पाशुपतास्त्र स्तोत्र के साथ किया जाए। विशेष रूप से, घी और गुग्गुल का होम करने से कठिन कार्य भी सिद्ध हो सकते हैं। साधना के लिए यह भी बताया गया है कि मंत्रों का चयन केवल गुरु द्वारा किया जाना चाहिए। सही मंत्र का ज्ञान गुरु ही दे सकते हैं। इसके अलावा, पाठक को अपने ईमेल के माध्यम से और जानकारी प्राप्त करने के लिए भी आमंत्रित किया गया है। इस पाठ में साधना की विधि, मंत्र का महत्व और सिद्धि के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है, जो यह दर्शाता है कि साधना में अनुशासन और गुरु की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।


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