चिकित्सा चंद्रोदय | Chikitsa Chandrodaya

By: बाबू हरिदास वैध - Babu Haridas Vaidhya
चिकित्सा चंद्रोदय  | Chikitsa Chandrodaya by


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद के महत्व, उसके उत्पत्ति और विभिन्न ग्रंथों का विवरण दिया गया है। आयुर्वेद को "आयु" और "वेद" के संयोग से निर्मित एक ऐसा विद्या माना गया है जो जीवन के हित और अहित का ज्ञान प्रदान करती है। यह बताया गया है कि आयुर्वेद का अध्ययन हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है, ताकि वे रोगों के निदान और जीवन की गुणवत्ता को सुधार सकें। पाठ में आयुर्वेद की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है कि यह प्राचीन समय में ब्रह्मदेव द्वारा रचित एक ग्रंथ "त्रह्मसंहिता" से शुरू हुआ, जिसमें आयुर्वेद के ज्ञान को दक्ष प्रजापति और उसके बाद अश्विनीकुमारों को सिखाया गया। महर्षि आत्रेय ने भी इस विद्या का विस्तार किया और कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे। आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथों में "चरक संहिता", "सुश्रुत संहिता", "वाग्भट्ट", और "माधव निदान" का उल्लेख किया गया है। चरक संहिता को चिकित्सा का आधार मानते हुए कहा गया है कि इसके बिना चिकित्सा करना उचित नहीं है। सुश्रुत संहिता शल्य चिकित्सा का विस्तृत विवरण देती है, जबकि वाग्भट्ट का ग्रंथ आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। माधव निदान रोगों के निदान के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। पाठ में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद की विद्या का अध्ययन करके व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि अन्य लोगों की भी मदद कर सकता है। इस प्रकार, पाठ आयुर्वेद के ज्ञान और उसके अध्ययन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।


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