आदि गुरु शंकराचार्य | Adi Guru Shankaracharya

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy संस्कृत /sanskrit हिंदू - Hinduism
- लेखक: इंद्रा, स्वप्न - Indra, Swapn
- पृष्ठ : 248
- साइज: 24 MB
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दो शब्द :
इस उपन्यास में आचार्य शंकराचार्य के जीवन और उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन किया गया है। शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को पुनर्स्थापित करने, मन्दिरों की प्रतिष्ठा करने और जनकल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी रचनाएँ और उपदेश आज भी आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। उपन्यास में बताया गया है कि कैसे जर्मनी के संस्कृत विद्वान डॉ. पाल डायसन ने शंकराचार्य के ब्रह्मसृत्रों पर किए गए भाष्य का जर्मन में अनुवाद करने के लिए उसे कई बार पढ़ा। शंकराचार्य ने 'तत्त्वमसि' के सिद्धांत के माध्यम से जीवात्मा और ब्रह्म की एकता को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सभी आत्माएँ एक हैं, जिससे शांति का संदेश मिलता है। इसमें शंकराचार्य के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ और उनके शिक्षाप्रद कार्यों का उल्लेख किया गया है। उपन्यास का उद्देश्य पाठकों को शंकराचार्य के महान कार्यों और शिक्षाओं से प्रेरित करना है। शंकराचार्य का जीवन और उनका योगदान न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। उपन्यास में उनकी माता-पिता की श्रद्धा और आस्था का भी उल्लेख है, जिन्होंने शंकर के जन्म के लिए भगवान शिव से वरदान मांगा था। शंकराचार्य ने छोटी सी आयु में ही अद्वितीय ज्ञान और तात्त्विकता का प्रदर्शन किया और उन्होंने चारों दिशाओं में चार मठ स्थापित कर हिंदू धर्म को सुदृढ़ किया। उपन्यास अंततः यह संदेश देता है कि शंकराचार्य का जीवन और उनके उपदेश आज के समाज के लिए मार्गदर्शक हैं और हमें उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए।
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