सिंधु घाटी सभ्यता | Sindhu Ghati Sabhyata

By: डॉ. किरण कुमार थपल्याल - Dr. Kiran Kumar Thapalayal


दो शब्द :

इस पाठ में 'सिन्धु सभ्यता' के उद्भव, विकास और महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक डॉ. किरण कुमार धपल्याल और डॉ. संकटा प्रसाद शुक्ल ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की है। सिन्धु सभ्यता का उद्भव सिन्धु नदी के तट पर हुआ, लेकिन इसके विकास में विभिन्न विद्वानों के मत भिन्न हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि सिन्धु सभ्यता के निर्माता वैदिक आर्य थे। लेख में वेदों के महत्व और उनके संदर्भ में 'सिन्धु' शब्द के उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। सिन्धु घाटी की सभ्यता को विकसित नगरीय संस्कृति माना जाता है, जिसमें नगर विन्यास, स्थापत्य कला, धार्मिक विश्वास, आर्थिक जीवन, और लिपि का उल्लेख किया गया है। पुरातात्त्विक खोजों ने इस सभ्यता के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया है, जैसे नगरों का निर्माण, उपयोग की जाने वाली वस्तुएं, और धार्मिक अनुष्ठान। पुस्तक में विभिन्न अध्यायों के माध्यम से सिन्धु सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन किया गया है, जैसे मूर्तियाँ, मुद्राएँ, आर्थिक जीवन, और अन्य सांस्कृतिक पहलू। यह पुस्तक न केवल इतिहास के छात्रों के लिए उपयोगी है, बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्धक है। लेख के अंत में, पुस्तक के अनेक संस्करणों का उल्लेख किया गया है और पाठकों से उनके सुझावों का स्वागत किया गया है, ताकि इस विषय पर और अधिक शोध और जानकारी प्राप्त की जा सके।


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