काय चिकित्सा | Kaay chikitsa

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद पाठ्यपुस्तक / Textbook
- लेखक: स्वामी विद्यानन्द - Swami Vidhyanand
- पृष्ठ : 656
- साइज: 22 MB
- वर्ष: 1993
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय चिकित्सा विज्ञान, विशेष रूप से आयुर्वेद के महत्व और उसकी विशिष्टताओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने चिकित्सा विज्ञान को मानवता के लिए एक प्रकाश स्तम्भ के रूप में प्रस्तुत किया है, जो स्वास्थ्य, साहस, प्रेम, और करुणा से ओत-प्रोत समाज की दिशा में मार्गदर्शन करता है। आयुर्वेद की पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने का भी उल्लेख किया गया है। लेखक ने अपनी किताब "कायचिकित्सा" के पहले भाग की सफलता का जिक्र करते हुए, द्वितीय भाग की रचना का आनंद भी व्यक्त किया है। उन्होंने इस पुस्तक में कायचिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया है, जिसमें ज्वर, सन्निपातज्वर, विषमज्वर, और अन्य ज्वरों का निदान, लक्षण, और उपचार शामिल हैं। पुस्तक में विभिन्न अध्यायों के माध्यम से ज्वर की विभिन्न श्रेणियों का विश्लेषण किया गया है, जैसे ज्वर की उत्पत्ति, उसके प्रकार, और उनके निदान के तरीके। लेखक ने पाठकों की जिज्ञासाओं का सम्मान करते हुए, आयुर्वेद के चिकित्सा सिद्धांतों को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाने का प्रयास किया है। अंत में, लेखक ने अपने सहयोगियों और प्रकाशकों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस ग्रंथ के प्रकाशन में सहायता की। यह पुस्तक न केवल छात्रों और अध्यापकों के लिए, बल्कि आयुर्वेद के प्रति रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी है।
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