अनुवाद विज्ञानं | Anuvad Vigyan

By: डॉ भोलानाथ तिवारी - Dr. Bholanath Tiwari
अनुवाद विज्ञानं | Anuvad Vigyan by


दो शब्द :

इस पाठ में अनुवाद विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया है कि अनुवाद और पुनरीक्षण (रिवीजन) के कार्य में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अनुवाद के दौरान व्यक्ति भावनाओं के आधार पर कार्य करता है, जबकि पुनरीक्षण के दौरान अनुवाद की समस्याओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है। लेखक ने उल्लेख किया कि उन्हें अनुवाद संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में विचार व्यक्त करने का अवसर मिला है, और उनकी पुस्तक का प्रारंभिक लेखन "अनुवाद" पत्रिका के विशेषांक के लिए किया गया था। पुस्तक में अनुवाद शब्द की व्युत्पत्ति, अर्थ और इतिहास पर भी चर्चा की गई है। 'अनुवाद' शब्द का संबंध 'वद्' धातु से है, जिसका अर्थ होता है 'कहना' या 'बोलना'। यह शब्द प्राचीन भारत में शिक्षा की परंपरा से भी जुड़ा है, जहां गुरु के कहने को शिष्य दुहराते थे। लेखक ने संस्कृत साहित्य में 'अनुवाद' शब्द के विभिन्न उपयोगों और संदर्भों का उल्लेख किया है, जिसमें 'पुनः कथन' या 'ज्ञात को कहना' जैसे अर्थ शामिल हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि प्राचीन भारत में अनुवाद की प्रक्रिया अवश्य होती थी, हालांकि इसके प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न भाषाओं में अनुवाद के लिए शब्दों के प्रयोग का भी उल्लेख किया गया है, जैसे कि 'छाया', 'टीका', 'तर्जुमा' आदि। अंत में, लेखक ने 'प्रतीकांतर' के विचार पर भी विचार करते हुए इसे अनुवाद का एक प्रकार माना है, जिसमें एक प्रतीक के माध्यम से व्यक्त विचार को दूसरे प्रतीक के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इस प्रकार, यह पाठ अनुवाद विज्ञान के विविध पहलुओं, उसके विकास और भाषा के प्रतीकात्मक अर्थ को समझने का प्रयास करता है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *