पातंजलयोगदर्शनम् | Patanjal yoga Darshan

- श्रेणी: योग / Yoga
- लेखक: रुद्र दत्त - Rudra Datt
- पृष्ठ : 402
- साइज: 12 MB
- वर्ष: 1924
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दो शब्द :
इस पाठ में योग और उसकी वैज्ञानिकता का वर्णन किया गया है। योग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जिसमें ध्यान, साधना, और आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए आवश्यक तत्वों का उल्लेख है। लेखक ने यह बताया है कि योग केवल बाह्य क्रियाओं का नाम नहीं है, बल्कि यह चित्त की स्थितियों और मानसिक अवस्था से संबंधित है। लेख में यह भी बताया गया है कि योग के अभ्यास से मनुष्य अपने दुःख और कष्टों को दूर कर सकता है और आत्मिक सुख की प्राप्ति कर सकता है। योग के चार प्रमुख पादों का उल्लेख किया गया है, जो समाधि, साधना, विभूति, और कैवल्य को दर्शाते हैं। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि सही योग का अनुभव करने के लिए मन और चित्त की स्थिरता आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा है कि आधुनिक लोग योग को गलत तरीके से समझते हैं और इसके वास्तविक अर्थ को नहीं जान पाते हैं। योग का सही अभ्यास करने से मनुष्य आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह के सुखों को प्राप्त कर सकता है। अंत में, पाठ में यह अपेक्षा की गई है कि पाठक योग के इस ज्ञान को समझें और अपने जीवन में इसे लागू करें।
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