मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र | Manovigyan Aur Shikshashastra

By: भैरव नाथ झा - Bhairav Nath Jha
मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र | Manovigyan Aur Shikshashastra by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक का मुख्य उद्देश्य मनोविज्ञान और शिक्षा के बीच के संबंध को स्पष्ट करना है। लेखक का मानना है कि मनोविज्ञान की समझ अध्यापकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बच्चों के मानसिक विकास और उनके व्यवहार को समझने में मदद करता है। शिक्षा का कार्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बच्चों की मानसिक और शारीरिक क्षमताओं का विकास सही दिशा में हो। लेखक ने यह उल्लेख किया है कि शिक्षा प्रणाली में मनोविज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। अध्यापकों को यह जानना चाहिए कि बच्चों की मानसिक स्थिति क्या है और उनकी प्रवृत्तियाँ कैसे विकसित होती हैं। इसके बिना, वे बच्चों को उचित तरीके से शिक्षित नहीं कर सकते हैं। पुस्तक में पश्चिमी मनोविज्ञान के विचारों को भी शामिल किया गया है और विभिन्न प्रयोगों के परिणामों का उल्लेख किया गया है, जो अध्यापकों के लिए सहायक हो सकते हैं। लेखक ने इस बात पर जोर दिया है कि अध्यापकों को मनोविज्ञान के सिद्धांतों का गहन अध्ययन करना चाहिए ताकि वे अपने छात्रों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनकी शिक्षा में सुधार कर सकें। इस प्रकार, यह पुस्तक न केवल अध्यापकों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए है जो शिक्षा में रुचि रखते हैं और बच्चों के विकास में योगदान देना चाहते हैं।


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