भारत में बौद्ध धर्म का क्षय | BHARAT MEIN BAUDH DHARM KA SHAY

By: दामोदर धर्मानंद कोसांबी - Damodar Dharmananda Kosambi पुस्तक समूह - Pustak Samuh


दो शब्द :

इस पाठ में भारत में बौद्ध धर्म की समाप्ति की चर्चा की गई है। बौद्ध धर्म, जो एक समय में भारत के अधिकांश हिस्सों में फैला हुआ था, धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खोता गया। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं, जैसे कि राजनीतिक अस्थिरता, धार्मिक मतभेद, तथा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन। धर्म की इस समाप्ति के साथ ही बौद्ध संस्कृति और शिक्षाओं का प्रभाव भी कम होता गया। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे बौद्ध धर्म ने भारतीय समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ उसने अपनी पहचान खो दी। बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ और इसके अनुयायियों की संख्या में कमी आना, समाज में अन्य धार्मिक आंदोलनों के बढ़ते प्रभाव के कारण हुआ। इस प्रकार, पाठ बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा और उसके अंत के कारणों का विश्लेषण करता है, जो भारतीय इतिहास और संस्कृति में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है।


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