हितोपदेश | Hitopdesh

By: नरायण पंडित - Narayan Pandit
हितोपदेश  | Hitopdesh by


दो शब्द :

इस पाठ में राजा सुदर्शन का वर्णन है, जो पटना नामक नगर में शासन करता था। उसके पुत्र मूर्ख और व्यसनी थे, जिससे राजा चिंतित था। उसने विद्वानों की सभा बुलाई और अपने पुत्रों को विद्वान् बनाने का प्रस्ताव रखा। किसी भी विद्वान ने ऐसा करने की हिम्मत नहीं की, पर विष्णु शर्मा नामक विद्वान ने चुनौती स्वीकार की और छह महीने में राजकुमारों को शिक्षित करने का वचन दिया। विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को नीतियों और राजनीति की शिक्षा देने के लिए कहानियाँ सुनाईं, जिन्हें 'हितोपदेश' कहा गया। इस संग्रह की पहली कहानी मित्र लाभ पर आधारित है, जिसमें यह बताया गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति मित्रता के बल पर अपने कार्यों को सफल बना सकते हैं। कहानी के अनुसार, एक दिन एक कौवा शिकारी को देखता है और उसकी चालाकी से बचने की कोशिश करता है। शिकारी चावल बिखेरकर पक्षियों को फंसाने की कोशिश करता है, लेकिन कबूतरों का सरदार चित्रग्रीव समझदारी से सलाह देता है कि लोभ में नहीं फंसना चाहिए। फिर भी कबूतर चावल पर टूट पड़ते हैं और शिकारी के जाल में फंस जाते हैं। चित्रग्रीव ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें एक साथ उड़कर जाल से बाहर निकलना चाहिए। कबूतरों ने उसके सुझाव का पालन किया और शिकारी को धोखा देकर उड़ गए। फिर उन्होंने अपने मित्र हिरण्यक चूहे की मदद से जाल काटने का निर्णय लिया। यह पाठ न केवल शिक्षा और नीति का महत्व बताता है, बल्कि मित्रता और एकता की शक्ति को भी उजागर करता है।


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