पाण्डुलिपि विज्ञान | Panduleepi Vigyan

- श्रेणी: विज्ञान / Science
- लेखक: सत्येन्द्र - Satyendra
- पृष्ठ : 426
- साइज: 8 MB
- वर्ष: 1978
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दो शब्द :
पाण्डुलिपि विज्ञान पर आधारित यह पाठ पाण्डुलिपियों के लेखन, सजावट और उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करता है। लेखक डॉ. सत्येन्द्र ने पाण्डुलिपियों की सुंदरता और उनकी कलात्मकता पर जोर दिया है। उन्होंने बताया है कि पाण्डुलिपियाँ केवल文字 का संग्रह नहीं हैं, बल्कि यह एक कला का रूप ले लेती हैं, जिसमें लेखन, सजावट, चित्रकला और विभिन्न सामग्रियों का उपयोग होता है। लेखक ने पाण्डुलिपि के निर्माण में शामिल विभिन्न तत्वों का उल्लेख किया है, जैसे कि लेखनी, स्याही, और चित्रकला। उन्होंने बताया कि इन तत्वों का सही मिश्रण पाण्डुलिपि को एक उत्कृष्ट कलाकृति में बदल देता है। पाण्डुलिपियों में कलात्मकता का समावेश न केवल उनके सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि उनके मूल्य में भी वृद्धि करता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि पाण्डुलिपि विज्ञान एक विस्तृत और विविधतापूर्ण क्षेत्र है, जिसमें खोज और अनुसंधान की संभावनाएँ हैं। लेखक ने अपनी व्यक्तिगत रुचि और अनुभवों का भी उल्लेख किया है, जो पाण्डुलिपियों की खोज और अध्ययन में उनकी भागीदारी को दर्शाते हैं। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि पाण्डुलिपियाँ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं, जो न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि कला और विज्ञान का संगम भी प्रस्तुत करती हैं।
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