श्री माण्डूक्यो उपनिषद | Shri Mandukyo Upnishad

By: श्री गौडपादाचार्य - Shri Gaudapadacharya
श्री माण्डूक्यो उपनिषद | Shri Mandukyo Upnishad by


दो शब्द :

यह पाठ माण्ड्क्यो उपनिषद् पर आधारित है, जिसमें अद्वित वेदांत के सिद्धांतों का विवेचन किया गया है। उपनिषदों को वेदों का निष्कर्ष और गहन दार्शनिक विचारों का स्रोत माना जाता है। माण्ड्क्यो उपनिषद् की विशेषता यह है कि इसमें जीवन के मूल और आत्मा के वास्तविक स्वरूप का गहन विवेचन किया गया है। इस पाठ में गौडपादाचार्य द्वारा अद्वित वेदांत के सिद्धांतों की स्थापना की गई है, जिन्हें बाद में शंकराचार्य ने और विस्तार दिया। यह बताया गया है कि ब्रह्म और आत्मा का अद्वितीय संबंध है और आत्मा का ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है। पाठ में यह भी चर्चा की गई है कि मनुष्य का शरीर दुःख का आधार है, और इसे समझकर आत्मा के ज्ञान की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। वासना का नियंत्रण और ज्ञान वर्धन के माध्यम से आत्मा की वास्तविकता को पहचानना आवश्यक है। अंत में, यह बताया गया है कि सभी भौतिक वस्तुएं क्षर हैं, जबकि ब्रह्म अक्षर है, जो शाश्वत और अपरिवर्तनीय है। ज्ञान के माध्यम से आत्मा की पहचान करने से ही व्यक्ति शांति और मुक्ति प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार, माण्ड्क्यो उपनिषद् का यह पाठ आत्मा के ज्ञान, ब्रह्म की असली प्रकृति और जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट करता है, जो भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


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