भारतीय औषधियाँ | Bharatiya Aushadhiyan

By: शिव मंगल सिंह - Shiv Mangal Singh
भारतीय औषधियाँ  | Bharatiya Aushadhiyan by


दो शब्द :

यह पाठ "भारतीय औषधियाँ" नामक पुस्तक की प्रस्तावना और प्रकाशकीय है, जिसमें इसके लेखक, प्रकाशक और अनुसंधान का विवरण दिया गया है। पुस्तक को सर आर. एन. चोपड़ा द्वारा लिखा गया है और यह 'इंडिजेनस ड्रग्स ऑफ इंडिया' का हिन्दी अनुवाद है। इसका पहला संस्करण 1932 में प्रकाशित हुआ था और इसे चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, और आम जनता ने बहुत सराहा। इसके बाद से इसकी मांग बढ़ती गई थी, जिससे इसका हिन्दी अनुवाद करने की आवश्यकता महसूस हुई। प्रस्तुत अनुवाद डॉ. सकठा प्रसाद द्वारा किया गया है, जिन्होंने चिकित्सा संबंधी शब्दावली के अभाव में प्रारंभिक कार्य में कठिनाइयों का सामना किया। हालांकि, बाद में मानक शब्दावली उपलब्ध होने पर उन्होंने अनुवाद को पुनरीक्षित किया। पुस्तक में भारतीय औषधियों के गुण, उपयोग और उनके चिकित्सीय महत्व का विस्तृत वर्णन है, जिसमें आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के दृष्टिकोण भी शामिल हैं। इस पुस्तक के द्वितीय संस्करण में अनेक नई जानकारियाँ और अध्याय जोड़े गए हैं, जिनमें औषधियों का रासायनिक संघटन, उनके गुण, और प्रयोग के परिणाम शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय चिकित्सा पर आधारित शोध कार्यों और प्रयोगों के परिणामों को भी इसमें समाहित किया गया है। इस प्रकार, यह ग्रंथ औषधियों के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो न केवल चिकित्सकों के लिए बल्कि शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी है। यह पुस्तक भारतीय औषधियों की समृद्धि और उनके महत्व को उजागर करती है, साथ ही साथ उन अनुसंधानों को भी दर्शाती है जो इस क्षेत्र में किए गए हैं।


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