मानसरोवर (भाग - १) | Mansarovar

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel कहानियाँ / Stories हिंदी / Hindi
- लेखक: प्रेमचंद - Premchand
- पृष्ठ : 318
- साइज: 13 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक असचन्द ने कथा और उपन्यास की कला पर विचार किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे कथा साहित्य में पश्चिमी देशों से प्रेरणा लेकर एक नई दिशा में विकास हुआ है। लेखक ने यह स्वीकार किया है कि भारतीय साहित्य की प्रगति कुछ समय के लिए रुकी रही, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। लेखक ने बताया है कि आजकल की कहानियों में जीवन की समस्याओं और मनोविज्ञान का समावेश होना आवश्यक है। कहानी का प्रभाव तब अधिक होता है जब पाठक अपने अनुभवों से जुड़ता है। उन्होंने यह भी कहा है कि कहानी में चरित्रों का चित्रण महत्वपूर्ण है, और अच्छे लेखकों को अपने पात्रों के मनोभावों को सरलता से प्रस्तुत करना चाहिए। इसके अलावा, लेखक ने यह भी बताया है कि कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठक के मन में विचारों को उत्तेजित करना और उसे प्रेरित करना भी होना चाहिए। इसलिए, कहानियों में गहराई और तात्त्विकता होनी चाहिए, ताकि पाठक उन्हें पढ़ते समय अपनी भावनाओं को महसूस कर सके। अंत में, लेखक ने यह स्पष्ट किया कि आज की कहानियों में नए विचार और दृष्टिकोण आ रहे हैं, जिससे हिन्दी साहित्य में भी विविधता बढ़ रही है। इस प्रकार, उन्होंने कथा साहित्य के विकास और उसके महत्व पर प्रकाश डाला है।
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