अंतरिक्ष | Antariksha

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: राजीव सक्सेना - Rajeev Saksena
- पृष्ठ : 65
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 2004
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक राजीव सक्सेना ने ब्रह्माण्ड और अंतरिक्ष के विषय में सरल और रोचक जानकारी प्रस्तुत की है। उन्होंने उल्लेख किया है कि हिंदी में इस विषय पर ऐसी पुस्तकें नहीं थीं जो आम पाठकों को विज्ञान से जोड़ सकें, जबकि अंग्रेजी में इस प्रकार की किताबें पहले से ही लोकप्रिय हो चुकी हैं। लेखक ने अपनी पुस्तक के माध्यम से ब्रह्माण्ड की प्रकृति, उसकी उत्पत्ति, विस्तार और उस पर किए गए अनुसंधान पर चर्चा की है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि बाहरी अंतरिक्ष में बुद्धिमान जीवन की संभावना को नकारा नहीं किया जा सकता और इस संदर्भ में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधानों के कुछ प्रमाण भी दिए हैं। उन्होंने बताया है कि वर्तमान में अंतरिक्ष खोज में निरंतर प्रगति हो रही है, जिसमें कई सफल प्रक्षेपण और चंद्र यात्रा शामिल हैं। पुस्तक में एरिक वान डेनिकन का उल्लेख करते हुए, लेखक ने बताया कि वे नासा से जुड़े रहे हैं और उनके विचारों के माध्यम से पुस्तक की जानकारी को और भी रोचक बनाया गया है। लेखक ने यह आशा व्यक्त की है कि यह पुस्तक जिज्ञासु पाठकों, विज्ञान के विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। आगे लेखक ने ब्रह्माण्ड के अदृश्य काले छिद्रों (ब्लैक होल) का उल्लेख किया है, जो तारे तथा अन्य पिंडों को अपनी ओर खींच लेते हैं और इसके परिणामस्वरूप एक दिन ब्रह्माण्ड समाप्त हो सकता है। इसके बाद, ऊर्जा के रूप में नए कणों का निर्माण होगा और एक नई सृष्टि का आरंभ होगा। लेखक ने वैज्ञानिकों के बीच ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति पर विभिन्न सिद्धांतों का उल्लेख किया है, जिसमें बिग बैंग थ्योरी प्रमुख है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और उसके निरंतर विस्तार की प्रक्रिया आज भी जारी है। अंत में, लेखक ने यह भी कहा कि संभवतः हमारे ब्रह्माण्ड के अलावा और भी कई ब्रह्माण्ड मौजूद हो सकते हैं, जिससे उनकी जानकारी प्राप्त करना कठिन है। पाठ का सारांश इस प्रकार है कि यह विज्ञान और ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने का प्रयास है, जिसमें एक आम पाठक के लिए रोचक जानकारी प्रस्तुत की गई है।
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