ईशदूत ईसा | Iishaduut Iisaa

By: स्वामी विवेकानंद - Swami Vivekanand


दो शब्द :

इस पाठ में स्वामी विवेकानंद ने महात्मा ईसा के जीवन और उनके संदेश की गहन विवेचना की है। उन्होंने बताया है कि ईसा का जन्म एक ऐसे युग में हुआ जब यहूदी जाति का पतन हो रहा था। इस कठिन समय में ईसा जैसे महान व्यक्तित्व का उदय हुआ, जिन्होंने अपने आदर्शों और शिक्षाओं के माध्यम से मानवता को एक नई दिशा दिखाई। स्वामी विवेकानंद ने यह भी बताया कि ईसा की शिक्षाएँ और उनके द्वारा दिया गया संदेश विश्व शांति और आंतरिक शुद्धता की स्थापना में महत्वपूर्ण हैं। वे समझाते हैं कि मानवता के उत्थान और पतन का यह क्रम निरंतर चलता रहता है। महापुरुषों का जीवन और उनके आदर्श समय-समय पर पुनर्जन्म लेते हैं, जिससे समाज में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। स्वामी विवेकानंद ने यह भी इंगित किया कि हर व्यक्तित्व, चाहे वह कितना भी साधारण क्यों न हो, अपने अतीत और समाज के अनुभवों का प्रतिनिधित्व करता है। ईसा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि वे अपने समय की समस्याओं का समाधान करने के लिए आए थे। स्वामी विवेकानंद ने यह भी कहा कि महान व्यक्तित्वों की पूजा केवल उनकी महानता के कारण नहीं, बल्कि इसलिए की जाती है कि वे मानवता को ऊँचाईयों तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। उनका जीवन और शिक्षाएँ हमें प्रेरणा देती हैं कि हम अपने भीतर की दिव्यता को पहचानें और उसे विकसित करें। इस प्रकार, ईसा का जीवन एक आदर्श उदाहरण है, जो न केवल उनके समय के लिए, बल्कि सभी कालों के लिए प्रासंगिक है।


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