भारत-भैषज्य -रत्नाकर | Bharat bheshajya Ratnakar

By: हरस्वरूप शर्मा - harswaroop sharma
भारत-भैषज्य -रत्नाकर | Bharat bheshajya Ratnakar by


दो शब्द :

इस पाठ का मुख्य विषय आयुर्वेद और उसकी औषधियों का ज्ञान है। पाठ में ऊंझा फार्मसी लिमिटेड के संस्थापक स्व. रसवेध नगीवदास छगनटाछ शाह द्वारा तैयार की गई पुस्तक "भारत-मैषज्य-रत्नाकर" का उल्लेख किया गया है, जिसमें अनेक आयुर्वेदिक औषधियों का संग्रह है। इस पुस्तक की हिंदी टीका स्व. वेध पे. गोपीनाथ गुप्त ने की थी और यह पुस्तक वैध समाज में अत्यधिक सम्मानित है। पाठ में यह भी बताया गया है कि वर्तमान समय में इस पुस्तक के सभी भाग उपलब्ध नहीं हैं, जिससे वैध समाज को अधिक खर्च उठाना पड़ता है। इसलिए, इस ज्ञान को संकलित कर "भैषम्य-सार-संग्रह" नाम की नई पुस्तक प्रकाशित की जा रही है, जो आयुर्वेदिक फार्माकोपिया के रूप में कार्य करेगी। लेखक, कविराज हरस्वरूप शर्मा, ने इस पुस्तक के लिए विशेष प्रयास किया है और इसमें वर्णित प्रयोग प्रमाणित और सिद्ध औषधियों पर आधारित हैं। पाठ में आयुर्वेद के ज्ञान की महत्ता, मानव जीवन के कल्याण में उसकी भूमिका, और शरीर के तत्वों के संतुलन की आवश्यकता को भी दर्शाया गया है। आयुर्वेद का उद्देश्य रोगों से मुक्ति और स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करना है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि मानव की त्रिविध इच्छाओं (प्राणैषणा, धनैषणा, और परलेकैषणा) को पूरा करने के लिए शरीर का स्वस्थ होना आवश्यक है। कुल मिलाकर, यह पाठ आयुर्वेद और उसकी औषधियों के महत्व को उजागर करता है तथा मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए इसका ज्ञान आवश्यक बताता है।


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