यशोधरा | Yashodhara by


दो शब्द :

इस पाठ में भगवान बुद्ध के जीवन और उनके अवतरण की कथा प्रस्तुत की गई है। पाठ की शुरुआत किसी गाँव के कृषक गृहस्थ और एक पथिक के बीच वार्तालाप से होती है। पथिक, जो थका हुआ है, गृहस्थ से रात बिताने के लिए स्थान मांगता है। गृहस्थ के घर के भीतर परिवार के सदस्य आते हैं और पथिक से कथा सुनाने का आग्रह करते हैं। पथिक अपनी कथा सुनाते हैं, जिसमें वह भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन करते हैं। भगवान बुद्ध, जिसका जन्म सिद्धार्थ के नाम से हुआ था, का जीवन संघर्ष और त्याग से भरा हुआ था। उन्होंने अपने पिता शुद्धोधन के महल में ऐशो-आराम से भरी जिंदगी गुजारी, लेकिन जब उन्होंने संसार के दुखों को देखा, तब उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्यागने का निर्णय लिया। सिद्धार्थ ने पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल को छोड़कर साधना की ओर अग्रसर होने का निर्णय लिया। साधना करते-करते सिद्धार्थ ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अंततः उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे बुद्ध बने। उन्होंने जीवन के दुखों का समाधान बताया और सत्य का मार्ग प्रसारित किया। पाठ में यह भी दर्शाया गया कि बुद्ध ने कर्मकांड के आडंबर की बजाय सदाचार को प्राथमिकता दी। इस प्रकार, यह कथा भगवान बुद्ध के जीवन की यात्रा और उनके शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करती है, जो मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं।


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