चम्पू-रामायण | Champu-ramayana

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता धार्मिक / Religious संस्कृत /sanskrit हिंदू - Hinduism
- लेखक: पंडित काशीनाथ - Pandit Kashinath
- पृष्ठ : 438
- साइज: 20 MB
- वर्ष: 1898
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दो शब्द :
इस पाठ में वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। इसमें रामायण की रचना की पृष्ठभूमि, काव्य के उद्देश्य, और इसके महत्व पर चर्चा की गई है। पाठ में यह बताया गया है कि वाल्मीकि ने रामायण को कैसे रचा और इसमें उन्होंने किस प्रकार के अलंकारों का प्रयोग किया। पाठ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भगवान राम के गुणों और उनके चरित्र पर केंद्रित है। रामायण में भगवान राम की महिमा और उनके आदर्शों का वर्णन किया गया है, जिससे पाठक को उनके चरित्र की गहराई और महानता का अनुभव होता है। इसमें जनसामान्य के लिए रामायण का शिक्षाप्रद होना, और यह कैसे लोगों को धर्म और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है, इस पर भी बल दिया गया है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। पाठ में रामायण के विभिन्न पात्रों और उनके कृत्यों का संक्षिप्त वर्णन भी है, जो इसके नैतिक और दार्शनिक संदेशों को उजागर करता है। इस प्रकार, यह पाठ रामायण के साहित्यिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व को दर्शाता है और इसके माध्यम से पाठक को रामायण के गूढ़ अर्थ और संदेशों को समझने में मदद करता है।
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