होम्योपथ्य चिकित्सा सार | Homyopathya Chikitsa Sar

By: एल. राय - Dr. L. Rai


दो शब्द :

इस पाठ में होमियोपैथिक चिकित्सा और इसके संस्थापक हेनिमन की जीवनी पर चर्चा की गई है। हेनिमन का जन्म जर्मनी में 1755 में हुआ था और उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कई अनुसंधान किए। उन्हें पारंपरिक चिकित्सा में संतोष नहीं मिला, इसलिए उन्होंने होमियोपैथी की खोज की। उन्होंने देखा कि कुनाइन, जो मलेरिया का इलाज करता है, उसी तरह के लक्षण उत्पन्न करता है जैसे मलेरिया। इस अनुभव से उन्होंने "समः सम शमयति" का सिद्धांत विकसित किया, जिसका अर्थ है कि एक औषधि वही लक्षण उत्पन्न करती है जो रोग में होते हैं। हेनिमन ने स्वास्थ्य के लिए विभिन्न विषाक्त पदार्थों का सेवन करके उनके लक्षणों का अध्ययन किया। उन्होंने होमियोपैथिक चिकित्सा के सिद्धांतों का विकास किया, जो रोगों का इलाज करने के लिए प्राकृतिक और हल्की दवाओं का उपयोग करते हैं। उनका यह विचार भी था कि एक रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए वही औषधि दी जानी चाहिए जो उन लक्षणों को उत्पन्न करती है। पाठ में यह भी उल्लेख है कि होमियोपैथी का उपयोग सभी प्रकार के रोगों के लिए किया जा सकता है और यह सभी आयु के लोगों के लिए लाभदायक है। हालांकि, कुछ लोग होमियोपैथी की प्रभावशीलता पर संदेह करते हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि होमियोपैथिक मेटिरिया मेडिका वे पुस्तकें हैं जिनमें औषधियों के गुण और लक्षणों का विवरण होता है। संक्षेप में, पाठ हेनिमन की खोज, होमियोपैथिक चिकित्सा के सिद्धांत और इसकी प्रभावशीलता पर प्रकाश डालता है।


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