धन्वन्तरि वनोषधि | Dhanvantri Vanoshdhi

By: वैधाचार्य उदयलाल महात्मा - Vaedhachaarya Udaylal Mahatma
धन्वन्तरि वनोषधि  | Dhanvantri Vanoshdhi by


दो शब्द :

इस पाठ में धन्वन्तरि नामक विशेषांक के संबंध में विभिन्न जानकारी दी गई है। पाठकों से अनुरोध किया गया है कि वे विशेषांक के ऊपर के रेपर को संभाल कर रखें, जिसमें ग्राहक संख्या और पोस्ट ऑफिस का नंबर लिखा होता है। भविष्य में पत्र व्यवहार करते समय ग्राहक संख्या का उल्लेख करने का आग्रह किया गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि यदि किसी को अड्डू (खर्च) प्राप्त नहीं होता है, तो उसे पोस्ट ऑफिस में जांच करनी चाहिए और पोस्ट व्यय के लिए टिकट भेजने की सलाह दी गई है। पाठ में नए ग्राहकों को जोड़ने का प्रयास करने के लिए भी प्रेरित किया गया है। इसके अलावा, यह विशेषांक फरवरी-मार्च के लिए है। पाठ के अंत में बताया गया है कि यह विशेषांक पाठकों को आयुर्वेद और वनौषधि के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, और इसकी उपयोगिता के लिए पाठकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे इसे प्राप्त करें। पाठ में विभिन्न जड़ी-बूटियों और उनके गुणों की सूची भी दी गई है, जिससे पाठकों को उनकी पहचान और उपयोगिता के बारे में जानकारी मिल सके। अंत में, पाठकों को यह भी बताया गया है कि यदि वे धन्वन्तरि के ग्राहक बने रहेंगे, तो उन्हें आगामी वर्षों में विशेष लाभ प्राप्त होंगे।


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