पंज  | Panj by


दो शब्द :

अमृता प्रीतम का परिचय देते हुए कहा गया है कि उनका जन्म 3 अगस्त 1919 को गुजरांवाला, पंजाब में हुआ। उनका बचपन लाहौर में बीता और वहीं उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। प्रीतम ने किशोरावस्था से ही लेखन शुरू किया, जिसमें कविता, कहानी, उपन्यास और निबंध शामिल हैं। उनके कार्यों की संख्या 50 से अधिक है और उनकी महत्वपूर्ण रचनाएँ कई विदेशी भाषाओं में अनूदित की गई हैं। उन्होंने पत्रकारिता में भी रुचि दिखाई, जिसमें 'नागमणि' मासिक पत्रिका का उल्लेख किया गया है, जो 1966 से निरंतर प्रकाशित हो रही है। प्रीतम को कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जैसे कि अकादमी पुरस्कार, पंजाब सरकार का पुरस्कार, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि, और 1982 में भारत का सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार। पाठ में आगे एक कहानी का वर्णन किया गया है जिसमें एक महिला, पूरो, की जीवन की कठिनाइयों और उसकी भावनाओं का चित्रण किया गया है। पूरो के परिवार की आर्थिक स्थिति में गिरावट आई है, और उसके माता-पिता अपनी पारिवारिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरो की मां चाहती है कि उसकी बेटी का विवाह एक अच्छे परिवार में हो, लेकिन पूरो को अपने भविष्य के बारे में चिंताएँ हैं। कहानी में पूरो की मासूमियत, उसकी स्त्रियों के बीच विश्वास, और विवाह की तैयारियों का वर्णन किया गया है। पूरो की माँ विधिमाता की पूजा करती है ताकि पूरो को एक पुत्र हो, और इस से जुड़ी परंपराओं का भी संदर्भ दिया गया है। पूरो की भावनाएँ, उसकी आशाएँ और उसके सपने इस कहानी में प्रमुखता से उभरते हैं। कहानी के अंत में पूरो के विवाह की तैयारी और उसकी मनोदशा का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो उसकी जिंदगी के नए मोड़ को दर्शाता है। पूरो का अपने भविष्य के प्रति उत्साह और चिंताएँ, उसके सामाज में स्त्री की स्थिति को उजागर करती हैं।


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