अँधेरे में उजाला | Andhere Me Ujala

- श्रेणी: कहानियाँ / Stories नाटक/ Drama
- लेखक: क्षेमानंद 'राहत' - Kshemanand 'Rahat'
- पृष्ठ : 166
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1928
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दो शब्द :
इस पाठ में 'सस्ता-साहित्य-मंडल' द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का उल्लेख किया गया है, जिसमें पाठकों से यह अनुरोध किया गया है कि वे इन पुस्तकों के विषय, पृष्ठ संख्या और मूल्य पर विचार करें। पाठ में मंडल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के नाम और स्थाई आहक के नियमों का भी उल्लेख है, जिसे पाठकों को पढ़ने के लिए कहा गया है। इसके बाद, एक पंक्ति में सुशीला देवी को एक पुस्तिका समर्पित की गई है, जिसमें शारीरिक यातनाओं को भगवान की इच्छा से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से भाई की आत्मा को जागृत और स्वस्थ बनाने का संदेश दिया गया है। पाठ का अगला भाग प्रसिद्ध लेखक टॉल्स्टॉय के जीवन और उनके विचारों पर केंद्रित है। टॉल्स्टॉय को एक महान विचारक और लेखक बताया गया है, जिन्होंने न केवल रूस में बल्कि पूरे यूरोप में सामाजिक और धार्मिक रूढ़ियों के खिलाफ आवाज उठाई। उनके लेखन में धार्मिक, सामाजिक, और नैतिक विचारों की गहराई है, और उन्होंने अपने जीवन में सादगी और श्रम का महत्व समझा। टॉल्स्टॉय का प्रारंभिक जीवन धन और सम्पत्ति से भरा था, लेकिन उन्होंने अपने विचारों के अनुसार अपने जीवन को साधारण बनाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक और व्यक्तिगत आदर्शों को अपनाया और अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उनका जीवन एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो बताता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने आदर्शों के लिए संघर्ष कर सकता है। पाठ के अंत में, टॉल्स्टॉय के नाटक 'अंधेरे में उजाला' का उल्लेख किया गया है, जो उनकी कला के उद्देश्य को दर्शाता है। यह नाटक उनके व्यक्तिगत जीवन की छाया है और इसमें उनके परिवार के अनुभवों का समावेश है। टॉल्स्टॉय की कला को जीवन को मधुर और सुंदर बनाने के लिए आवश्यक बताया गया है।
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