अभिधनारजेन्द्र | Abhidhnarjendra

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth धार्मिक / Religious संस्कृत /sanskrit हिंदी / Hindi
- लेखक: विजया राजेंद्र सुरी - Vijayarajendra Suri
- पृष्ठ : 1060
- साइज: 92 MB
- वर्ष: 1913
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दो शब्द :
इस पाठ में संस्कृत व्याकरण और शब्दों के प्रयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। इसमें शब्दों के धातुओं, उनके रूपों, और उनके उच्चारण के नियमों को समझाया गया है। पाठ में वर्ण, स्वर, और व्यंजन की विशेषताओं के साथ साथ, उनके संयोजनों के माध्यम से नए शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया है। पाठ में शब्दों के विभिन्न रूपों और उनके प्रयोग की विधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि संज्ञा, क्रिया, विशेषण, आदि। इसके अलावा, विभिन्न संज्ञाओं के रूपों की व्याख्या की गई है और यह बताया गया है कि किस प्रकार से शब्दों का संयोजन और परिवर्तन किया जा सकता है। पाठ में व्याकरणिक नियमों और शब्दों की संरचना के माध्यम से प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करने की क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह पाठ छात्रों और भाषा के अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है, जिससे वे भाषा के जटिल पहलुओं को समझ सकें और उनका सही उपयोग कर सकें।
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