गबन | Gaban

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel कहानियाँ / Stories साहित्य / Literature
- लेखक: प्रेमचंद - Premchand
- पृष्ठ : 309
- साइज: 90 MB
- वर्ष: 1987
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ प्रेमचंद के उपन्यास "गबन" का एक अंश है, जिसमें मुख्यतः शहरी नवयुवकों के जीवन में दिखावे और भौतिकवाद की समस्या को दर्शाया गया है। उपन्यास के नायक ऐसे लोग हैं जो पश्चिमी सभ्यता की आभा से प्रभावित होकर अपने जीवन को दिखावे में बर्बाद कर देते हैं। यह दिखावा शिक्षा और नारी जीवन में भी दिखाई देता है, जहां लोग एक-दूसरे को धोखा देते हैं। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में समाज के निचले वर्ग के लोगों की समस्याओं को उजागर किया है और उन्होंने अपने जीवन में भी गरीबी का सामना किया। उनके लेखन में गरीब किसानों और श्रमिकों का जीवन प्रमुखता से आता है। पाठ में एक बरसात के दिन की सुंदरता का वर्णन किया गया है, जबकि एक बिसाती बाजार में आकर अपने चमकीले सामान बेच रहा है। एक माता-पिता अपनी बेटी के लिए गहने खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। रमा, जो मुख्य पात्र है, अपनी पत्नी जालपा के लिए गहनों की खरीदारी में उलझा हुआ है और उसे कीमतों को लेकर चिंता होती है। जालपा अपने पति के सामने गहनों की चमक और सुंदरता से प्रभावित होकर उन्हें खरीदने की इच्छा प्रकट करती है, जबकि रमा अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित है। अंततः जालपा और रमा मिलकर गहनों को खरीद लेते हैं, लेकिन रमा के मन में यह चिंता बनी रहती है कि क्या वे इस भारी खर्च का सामना कर पाएंगे। पाठ में प्रेम, दिखावे और जीवन की सच्चाइयों के संघर्ष को दर्शाया गया है। इस प्रकार, "गबन" उपन्यास हमें दिखावे की दुनिया में सच्चाई और वास्तविकता की महत्ता का अहसास कराता है।
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