जयद्रथ - वध | Jaidrath – Vadh

- श्रेणी: काव्य / Poetry धार्मिक / Religious
- लेखक: मैथिलीशरण गुप्त - Maithili Sharan Gupt
- पृष्ठ : 106
- साइज: 3 MB
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दो शब्द :
इस काव्य का शीर्षक "जयद्रथ-वध" है, जो महाभारत के एक प्रमुख प्रसंग पर आधारित है। इसमें अभिमन्यु की वीरता और बलिदान का वर्णन किया गया है। अभिमन्यु, जो अर्जुन का पुत्र है, चक्रव्यूह को भेदने के लिए रणभूमि में प्रवेश करता है। कविता की शुरुआत में पाठक को प्रेरित किया गया है कि कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने धर्म का पालन करना चाहिए। इस संदर्भ में पांडवों और कौरवों के बीच हुए युद्ध को दर्शाया गया है, जो भारत की महाकवि कथा का हिस्सा है। अभिमन्यु को चक्रव्यूह भेदने के लिए अपने पिता अर्जुन से प्रेरणा मिलती है। वह अपने साहस और धैर्य से युद्ध के मैदान में प्रवेश करता है, हालांकि उसकी पत्नी उत्तरा उसे युद्ध में जाने से रोकने की कोशिश करती है। अभिमन्यु की वीरता का प्रदर्शन करते हुए यह दिखाया गया है कि वह अकेले ही चक्रव्यूह को भेदने में सक्षम है, जबकि उसके साथी उसे समर्थन देने में असमर्थ होते हैं। युद्ध के दौरान वह कई दुश्मनों को परास्त करता है, लेकिन अंततः उसे घेर लिया जाता है और उसके बलिदान को दर्शाया गया है। अभिमन्यु की साहसिकता और बलिदान को सम्मानित करते हुए, यह काव्य पाठक को प्रेरणा देता है कि वीरता और धर्म के मार्ग पर चलना हमेशा महत्वपूर्ण है। कविता अंत में अभिमन्यु के बलिदान पर ध्यान केंद्रित करती है, जो एक महान योद्धा के रूप में याद किया जाएगा और जो अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति देता है। यह पाठ महाभारत की गहराई और पात्रों की जटिलताओं को उजागर करता है, विशेषकर अभिमन्यु की वीरता और उसके बलिदान की महत्ता को।
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