नीतिशतकम् | Niti Shatakam
- श्रेणी: अर्थशास्त्र / Economics दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy
- लेखक: भर्तृहरि - Bhartrahari
- पृष्ठ : 110
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1909
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दो शब्द :
इस पाठ में शिवाजी की वीरता और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने शिवाजी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनके जीवन की घटनाओं को सुनाने का उद्देश्य रखा है। पाठ में यह उल्लेख किया गया है कि शिवाजी का जीवन न केवल साहस और वीरता से भरा था, बल्कि उन्होंने अपने समय में सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए। लेखक ने यह भी बताया है कि नीतिशिक्षा का अभाव आज के समाज में विद्वानों और शिक्षित व्यक्तियों की कमी का कारण बन रहा है। उन्होंने नीतिशिक्षा के महत्व पर जोर दिया और बताया कि केवल शैक्षणिक योग्यता से ही व्यक्ति सभ्य और कुशल नहीं बन सकता। नीतिशिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को सही और गलत का ज्ञान होता है, जो उसे एक अच्छा नागरिक बनाने में मदद करता है। पाठ में यह विचार भी प्रस्तुत किया गया है कि प्राचीन भारत में नीतिशिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्थान था और विद्वान लोग नीतिगत शिक्षाओं का पालन करते थे। लेखक ने चाणक्य, शुक्रनीति, और विदुर नीति जैसे प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख किया, जो नीतिशिक्षा के स्रोत रहे हैं। अंत में, लेखक ने नीतिशिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा को भी आवश्यक बताया और इस दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने यह सुझाव दिया कि शिक्षा के इस पहलू को समझने के लिए नीतिशतक जैसे ग्रंथों का अध्ययन करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी को सही दिशा में शिक्षित किया जा सके।
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