हिंदी साहित्य का इतिहास | Hindi Sahitya Ka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: रामचंद्र शुक्ल - Ramchandra Shukla
- पृष्ठ : 808
- साइज: 34 MB
- वर्ष: 1938
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दो शब्द :
इस पाठ में हिंदी साहित्य के इतिहास के विकास और उसके विभिन्न कालों का वर्णन किया गया है। लेखक ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक चरणों से लेकर आधुनिक काल तक के साहित्यिक परिवर्तनों और प्रवृत्तियों का अध्ययन किया है। हिंदी साहित्य का इतिहास लिखने की आवश्यकता तब महसूस हुई जब विश्वविद्यालयों में हिंदी की उच्च शिक्षा का प्रारंभ हुआ। इस कार्य के लिए नागरीप्रचारिणी सभा ने 1600 से 1611 तक कई अज्ञात कवियों और उनकी रचनाओं की खोज की। इस खोज के परिणामस्वरूप मिश्रबंधुओं ने 'मिश्रत्रंधु-विनोद' नामक एक बड़ा कवि-वृत्त-संग्रह प्रकाशित किया। लेखक ने साहित्य के विभिन्न कालों का नामकरण उनके विशेष लक्षणों के आधार पर किया है। आदिकाल को 'वीरगाथा काल' कहा गया है, जिसमें वीरगाथात्मक रचनाएँ प्रमुख हैं। इसके बाद भक्तिकाल की चर्चा की गई, जिसमें विभिन्न काव्य धाराओं का उल्लेख किया गया है। रीतिकाल के कवियों की विशेषताओं का भी अध्ययन किया गया है। आधुनिक काल में गद्य का महत्व बढ़ा है, और इस काल में साहित्य की विविधता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि वर्तमान काल के कई प्रतिभाशाली लेखकों और कवियों का नाम उन्हें जल्दी में या भूल से छूट गया हो सकता है, और इसके लिए उन्होंने क्षमा प्रार्थना की है। कुल मिलाकर, यह पाठ हिंदी साहित्य के इतिहास की समग्रता, उसके विभिन्न कालों और उनकी विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
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