अभिज्ञानशाकुंतलम | Abhigyanshakuntalam

By: कालिदास - Kalidas
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दो शब्द :

इस पाठ में महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध नाटक "शाकुन्तला" की समीक्षा की गई है। नाटक की कहानी राजा दुष्यन्त और शकुन्तला के प्रेम और विवाह के इर्द-गिर्द घूमती है। राजा ने शकुन्तला से गंधर्व विवाह किया, लेकिन बाद में उनके बीच दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण दूरियां आ जाती हैं। राजा दुष्यन्त, शकुन्तला को भुला देते हैं और जब शकुन्तला अपने पुत्र के साथ राजमहल में आती हैं, तो राजा उसे पहचान नहीं पाते। इस नाटक में कालिदास ने महाभारत और पद्मपुराण की कथाओं से प्रेरणा ली है, परंतु उन्होंने कई बदलाव किए हैं ताकि कहानी को और रोचक बनाया जा सके। महाभारत की कहानी में राजा दुष्यन्त का विवाह और शकुन्तला की पहचान की प्रक्रिया सरल और नीरस है, जबकि कालिदास ने इसको भावनात्मक और गहनता से प्रस्तुत किया है। पद्मपुराण की कथा में भी कुछ भिन्नताएं हैं, जैसे कि राजा का विवाह प्रस्ताव और शकुन्तला का तपोवन में रहना। कालिदास ने कथानक में कई बदलाव किए हैं, जैसे कि राजा और शकुन्तला के बीच की पहली मुलाकात, राजा का शकुन्तला को पहचानने का क्षण, और उनकी भावनाओं को और गहराई दी है। इस प्रकार, कालिदास ने "शाकुन्तला" के माध्यम से न केवल एक प्रेम कहानी प्रस्तुत की, बल्कि मानवीय भावनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को भी उजागर किया है, जिससे यह नाटक भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


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