महाभारत भीष्म पर्व | Mahabharat Bhishma Parva

By: रामस्वरूप शर्मा - Ramswarup Sharma
महाभारत भीष्म पर्व | Mahabharat Bhishma Parva by


दो शब्द :

इस पाठ में महाभारत के भीष्म पर्व से संबंधित घटनाओं का वर्णन किया गया है। यहाँ व्यास द्वारा भविष्यवाणी की जाती है कि कुरुक्षेत्र में युद्ध होने वाला है, जिसमें अनेक राजाओं की सेनाएँ आमने-सामने होंगी। व्यास, जो सत्यवती के पुत्र हैं, भविष्य के घटनाक्रम का ज्ञान रखते हैं और राजाओं के बीच होने वाले संघर्ष के प्रति शोक व्यक्त करते हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि धृतराष्ट्र, जो नेत्रहीन हैं, युद्ध की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। वह युद्ध के दृश्य को देखने के लिए व्यास से प्रार्थना करते हैं। व्यास उन्हें दिव्य दृष्टि का वरदान देते हैं, जिससे वह युद्ध के दौरान होने वाली घटनाएँ देख सकेंगे। धृतराष्ट्र की चिंता यह है कि युद्ध में उनके पुत्रों का क्या होगा, और वह अपने पुत्रों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। इसके अतिरिक्त, पाठ में युद्ध के समय की भयावहता और उसके परिणामों का भी उल्लेख है। यह बताया गया है कि युद्ध में भारी विनाश होगा और जीव-जंतुओं की हानि होगी। पाठ में युद्ध के संकेतक के रूप में विभिन्न प्राकृतिक और अदृश्य संकेतों का वर्णन किया गया है, जैसे पशुओं का व्यवहार, आकाश में ग्रहों की स्थिति, और अन्य अद्भुत घटनाएँ। इस प्रकार, पाठ में युद्ध की तैयारी, उसकी संभावनाएँ और उससे जुड़ी चिंताओं का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। यह महाभारत के गूढ़ रहस्यों और संघर्षों को उजागर करने वाला एक महत्वपूर्ण भाग है।


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