वस्त्र-विज्ञानं अवं परिधान | Vastra-vigyan Avam Paridhan

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति विज्ञान / Science साहित्य / Literature
- लेखक: प्रमिला वर्मा - Prmila Verma
- पृष्ठ : 720
- साइज: 36 MB
- वर्ष: 1973
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में वस्त्र-विज्ञान और परिधान के महत्व, उपयोग और अध्ययन की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। लेखक, डॉ. प्रमिला वर्मा, ने यह बताया है कि वस्त्र न केवल शरीर को ढकने और गर्म रखने के लिए आवश्यक हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिति, आकर्षण और सुरक्षा का भी प्रतीक होते हैं। वस्त्रों का उपयोग विभिन्न परिस्थितियों में किया जाता है, जैसे कि घरेलू कार्यों, सजावट और औद्योगिक उपयोग में। वस्त्र न केवल व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उनका समाज में भी विशेष स्थान है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि वस्त्रों का अध्ययन विभिन्न रेशों, उनके निर्माण, देखभाल और रासायनिक गुणों के संदर्भ में किया जाता है। पुस्तक में विभिन्न प्रकार के रेशों का वर्गीकरण, उनके गुण, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, निर्माण प्रक्रिया और उनके उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। इसके अतिरिक्त, लेखक ने परिधान के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्व, अवसरोचित परिधान और परिधान से जुड़े शिष्टाचार पर भी प्रकाश डाला है। इस ग्रंथ का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को वस्त्रों के विज्ञान और उनके सामाजिक संदर्भ में गहरी समझ प्रदान करना है, जिससे वे इस क्षेत्र में अध्ययन और अनुसंधान कर सकें। यह पुस्तक वस्त्र-विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है और इसकी लोकप्रियता और उपयोगिता इसे विशेष बनाती है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.