इबनबाबतूता की भारत यात्रा | Enbabatuta Ki Bharat Yatra

- श्रेणी: इतिहास / History दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India हिंदू - Hinduism
- लेखक: मदनगोपाल - Madangopal
- पृष्ठ : 438
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1988
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दो शब्द :
यह पाठ इब्न बतूता की यात्रा विवरण पर आधारित है, जिसमें उन्होंने अपने अनुभवों और यात्रा के दौरान हुई घटनाओं का वर्णन किया है। पाठ में इब्न बतूता अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हैं और अपने इतिहास प्रेम के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। वह विभिन्न स्थानों की यात्रा करते हैं, जैसे कि खंदापुर और शालियात, और वहाँ के लोगों, संस्कृति और परिस्थितियों का उल्लेख करते हैं। यात्रा के दौरान उन्हें अपने दासों से मिलते हैं और अपनी संपत्ति की हानि का अनुभव करते हैं। इब्न बतूता की यात्रा में कठिनाइयाँ आती हैं जैसे कि जहाज का डूबना और उनके साथियों का बिछड़ना। वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं और विभिन्न राजाओं और उनके राज दरबारों का अनुभव करते हैं, जहाँ उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं और युद्धों का सामना करना पड़ता है। पाठ में वर्णित घटनाएँ इब्न बतूता के साहस और दृढ़ता को दर्शाती हैं, साथ ही उस समय की राजनीतिक स्थितियों और सामाजिक जीवन का भी चित्रण करती हैं। वह विभिन्न साम्राज्यों और उनके शासकों के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख करते हैं, जिससे उस काल की जटिलताओं का पता चलता है। कुल मिलाकर, पाठ इब्न बतूता की रोमांचक यात्रा और उनके द्वारा अनुभव की गई सांस्कृतिक विविधताओं और संघर्षों का एक जीवंत चित्रण है।
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