मृत्युंजय | Mrityunjaya

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: श्री लक्ष्मीनारायण मिश्र - Shri Lakshminarayan Mishr
- पृष्ठ : 149
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1973
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक लक्ष्मीनारायण मिश्र ने गांधी पर नाटक लिखने के अपने अनुभवों और विचारों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि एक मित्र के कहने पर उन्होंने गांधी के जीवन पर नाटक लिखने का संकल्प लिया था। गांधी जी की हत्या के केवल चार साल बाद, उनके जीवन की घटनाओं को नाटक के रूप में प्रस्तुत करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। लेखक ने यह महसूस किया कि गांधी के जीवन और उनके विचारों को सही तरीके से व्यक्त करने के लिए गहन अध्ययन और समझ की आवश्यकता है। लेखक ने बताया कि उनके लिए यह नाटक लिखना एक कठिन यात्रा रही है, जिसमें समय के साथ उनकी लेखनी को गति मिली। उन्होंने गांधी के जीवन से जुड़े विभिन्न पात्रों की चर्चा की और बताया कि गांधी और उनके समकालीन व्यक्तित्वों के संवाद और व्यवहार को उन्होंने अपनी रचना में शामिल किया है। लेखक ने यह भी कहा कि वे जो कुछ भी लिखते हैं, वह उनके अंदर के भावों और विचारों का परिणाम है, जो कि गांधी के प्रति उनके सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि गांधी के विचारों और कार्यों को सही रूप में प्रस्तुत करना उनके लिए एक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे अपने कर्तव्य के रूप में स्वीकार किया। अंत में, लेखक ने अपनी रचना को एक श्रद्धांजलि के रूप में देखा, जो गांधी के योगदान को प्रस्तुत करती है और पाठकों के सामने उनके विचारों की महत्ता को उजागर करती है। यह नाटक पाठकों के मन में गांधी के प्रति एक अनूठा अनुभव उत्पन्न करने का प्रयास करता है, जिसमें करुणा, हास्य और जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है।
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