विवाहपद्धति | Vivaahpaddhti

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy
- लेखक: गुरु प्रसाद शर्मा - Guru Prasad Sharma
- पृष्ठ : 157
- साइज: 6 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ विवाह पद्धति के विभिन्न पहलुओं और प्रक्रियाओं को विस्तार से वर्णित करता है। इसमें विवाह से संबंधित संस्कार, अनुष्ठान, एवं मंत्रों का उल्लेख किया गया है। विवाह की प्रक्रिया में वर और वधू के बीच शांति, प्रेम और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित किया जाता है। पाठ में विवाह के समय किए जाने वाले विभिन्न अनुष्ठानों जैसे कि होम, अग्नि पूजन, और अन्य धार्मिक क्रियाओं का विवरण है। इसमें यह भी बताया गया है कि विवाह में पाणिग्रहण (हाथ पकड़ना) और सप्तपदी (सात फेरे लेना) जैसे महत्वपूर्ण चरण होते हैं। विवाह समारोह के दौरान विभिन्न मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, जो देवताओं की कृपा प्राप्त करने हेतु होते हैं। यह पाठ यह भी बताता है कि विवाह के दौरान वर और वधू को एक-दूसरे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और प्रेम का आदान-प्रदान करना चाहिए। इस प्रकार, यह पाठ विवाह की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है, और यह भी बताता है कि विवाह एक पवित्र बंधन है जो जीवन भर के लिए होता है। इसमें विवाह से पहले और बाद के अनुष्ठानों, मंत्रों, और प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन किया गया है, जो पाठक को विवाह की गहराई और महत्व को समझने में मदद करता है।
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