संस्कृत व्याकरण मंजरी | Sanskrit Vyakaran Manjari

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: श्रीराम स्वामिना - Sriram Swamina
- पृष्ठ : 870
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1930
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दो शब्द :
यह पाठ संस्कृत भाषा और उसके व्याकरण पर आधारित है। इसमें संस्कृत के महत्व, उसके उच्चारण नियमों, वाक्य संरचना, धातुओं और उपसर्गों की व्याख्या की गई है। संस्कृत को 'सर्वभाषाओं की जननी' कहा गया है, जो इसकी विश्वव्यापी मान्यता को दर्शाता है। पाठ में संस्कृत के अज्ञानता के अंधकार से निकालने की क्षमता और इसकी शिक्षा के माध्यम से धर्म व मोक्ष के तत्वों को समझने का प्रयास किया गया है। संस्कृत की शिक्षा के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें बच्चों को पहले वर्णमाला और फिर शब्द रूप, कारक, समास आदि सिखाने का सुझाव दिया गया है। पाठ में व्याकरण के नियमों को स्पष्ट किया गया है और यह बताया गया है कि संस्कृत के शब्दों का प्रयोग हिंदी में कैसे किया जाना चाहिए। संस्कृत का अध्ययन केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी जरूरी है जो आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पाठ में संस्कृत के विभिन्न व्याकरणिक विषयों, जैसे सन्धि, उपसर्ग, धातु, और उनकी परिभाषाओं के संदर्भ में उपयोगी जानकारी दी गई है। इसके अलावा, पाठ में व्याकरण के नियमों का पालन करते हुए शब्दों के सही उच्चारण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। अंत में, पाठ का उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उसके अध्ययन को सरल बनाना है, ताकि लोग इस प्राचीन भाषा के गहन ज्ञान को समझ सकें और उसका उपयोग कर सकें।
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