राजस्थानी भाषा और साहित्य | Rajasthani Bhasha Aur Sahitya

By: हीरालाल - Heralal
राजस्थानी भाषा और साहित्य | Rajasthani Bhasha Aur Sahitya by


दो शब्द :

इस पाठ में राजस्थानी भाषा और साहित्य का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने पुरानी राजस्थानी और उसके साहित्य का विश्लेषण किया है, जिसमें डॉ. टैसीटरी द्वारा किए गए पहले अध्ययन का उल्लेख किया गया है। राजस्थानी भाषा का विकास लूमभग संवत् 1100 से माना गया है, और इसके साहित्य का आरंभ इसी काल से होता है। 1500 के आस-पास राजस्थानी और गुजराती भाषाओं के बीच विभाजन हुआ। इस अध्ययन का मुख्य फोकस 1500 से 1650 के बीच के राजस्थानी साहित्य पर है। लेखक ने बताया है कि इस काल में साहित्य में नई प्रवृत्तियों का समावेश हुआ और कविता का स्वर बदल गया। राणा प्रताप और पृथ्वीराज राठौड़ के अवसान के बाद राजस्थानी साहित्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे गए। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि राजस्थानी साहित्य की बहुत कम रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं और अधिकांश हस्तलिखित प्रतियों के रूप में उपलब्ध हैं। लेखक ने राजस्थानी साहित्य के विभिन्न रूपों का सम्यक परिचय देने का प्रयास किया है और पुरानी हस्तलिखित प्रतियों के चित्र भी प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने अपने काम में विभिन्न विद्वानों के शोध और साहित्यिक योगदान का भी उल्लेख किया है। अंत में, लेखक ने यह स्वीकार किया है कि उनके काम में कुछ भूलें हो सकती हैं और उन्होंने पाठकों से क्षमा मांगी है। इस प्रबंध को तैयार करने में विभिन्न पुस्तकालयों और विद्वानों से मिली सहायता का भी उल्लेख किया गया है, और लेखक ने अपने गुरु डॉ. सुकुमार सेन का आभार व्यक्त किया है, जिनके मार्गदर्शन में यह कार्य संभव हुआ।


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