ब्रह्मचर्य व्रत | Brahmacharya Vrat

By: शंकर प्रसाद दीक्षित - Shankar Prasad Dixit
ब्रह्मचर्य व्रत | Brahmacharya Vrat by


दो शब्द :

इस पाठ में ब्रह्मचर्य की रक्षा के उपायों के बारे में चर्चा की गई है। ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए दो प्रमुख उपाय बताए गए हैं: क्रिया-मार्ग और ज्ञान-मार्ग। क्रिया-मार्ग शुद्ध आचरण के माध्यम से ब्रह्मचर्य की रक्षा करता है, जबकि ज्ञान-मार्ग अज्ञानता के संस्कारों का नाश करके ब्रह्मचर्य को सरल और स्वाभाविक बनाता है। ज्ञान-मार्ग को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन क्रिया-मार्ग की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। पाठ में बताया गया है कि ब्रह्मचारी को अनुशासन और संयम के साथ रहना चाहिए, जिसमें कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। जैसे कि स्त्रियों के प्रति आकर्षण से बचना, क्रामोत्तेजक पदार्थों का सेवन नहीं करना, और अधिक भोजन से दूर रहना। इसके अलावा, मन और इन्द्रियों पर संयम रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मन का ध्यान विपरीत विषयों में जाने से पाप का कारण बनता है। ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए शारीरिक, मानसिक और वाचिक संयम आवश्यक है। पाठ में विभिन्न नियमों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि स्नान, दन्तधावन से बचना, और मादक पदार्थों से दूर रहना। ब्रह्मचारी को सादा जीवन जीने, साधारण भोजन करने और संयमित आहार का सेवन करने की सलाह दी गई है। अंत में, यह कहा गया है कि ब्रह्मचर्य की रक्षा केवल शारीरिक क्रियाओं से नहीं, बल्कि मन के संयम से भी होती है, और इस प्रकार जागरूकता और साधना के माध्यम से ब्रह्मचर्य का पालन किया जाना चाहिए।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *