व्यक्तगांणित | Vyaktaganit

- श्रेणी: विज्ञान / Science साहित्य / Literature
- लेखक: पंडित बापू देव शास्त्री - Pandit Bapu Deva Sastri
- पृष्ठ : 120
- साइज: 8 MB
- वर्ष: 1875
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दो शब्द :
इस पाठ में गणित और विशेष रूप से व्यक्तगणित (Algebra) के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। इसमें गणित की मूल बातें जैसे संख्याओं का संयोग और वियाग करने की प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है। व्यक्तगणित का अर्थ है संख्याओं के विभिन्न कार्यों को समझना और उन्हें व्यवस्थित करना। पाठ में बताया गया है कि व्यक्तगणित में संख्याओं का जोड़, घटाव, गुणा और भाग करना शामिल है, और इसे विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है। गणित के इस क्षेत्र में विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है, जैसे संख्याओं का संयोग (संफलन), वियाग (व्यवकलन), गुणन और भागहार। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि गणित के सिद्धांतों को समझाने के लिए विभिन्न उदाहरणों का उपयोग किया गया है। लेखक ने एक ग्रंथ की रचना की है जिसमें व्यक्तगणित के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है ताकि विद्यार्थियों को इसे समझने में आसानी हो। पाठ के अंत में गणित के विभिन्न अध्यायों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है, जिसमें अभिन्न संख्याएँ, भिन्न संख्याएँ, दशमलव, और वाणिज्य गणित शामिल हैं। इस प्रकार यह पाठ गणित के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण श्रोत है जो उन्हें व्यक्तगणित और उसके उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
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