ओशो रजनीश का अधुनातम शिक्षा दर्शन | Osho Rajneesh Ka Adhunatam Shiksha Darshan

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy शिक्षा / Education
- लेखक: रामयश - Ramayash
- पृष्ठ : 221
- साइज: 73 MB
- वर्ष: 2002
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दो शब्द :
इस शोध प्रबंध में "ओशो (रजनीश) का अधुनातम् शिक्षा दर्शन" विषय पर चर्चा की गई है। शोधकर्ता रामयश ने इस विषय का चयन वर्तमान शिक्षा प्रणाली की समस्याओं और इसके सुधार के उद्देश्य से किया है। उनका मानना है कि आज की शिक्षा प्रणाली केवल व्यावसायिक कौशल सिखाने तक सीमित रह गई है, जो समाज के चारित्रिक और मानसिक विकास में सहायक नहीं है। रामयश ने यह बताया है कि शिक्षा केवल धन कमाने का माध्यम बन गई है, जिससे सामाजिक असमानता और अन्याय बढ़ रहा है। वे शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, जो कि व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास और नैतिकता का निर्माण करना होना चाहिए। शोध में ओशो की शैक्षिक विचारधारा का अध्ययन किया गया है, जिसमें ध्यान, योग और समन्वित सुख के सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। ओशो का मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को जागरूक करना भी होना चाहिए। शोध के अंत में, रामयश ने सुझाव दिए हैं कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह समाज के विकास में योगदान कर सके। उन्हें विश्वास है कि ओशो जैसे विचारक के दृष्टिकोण से शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। इस प्रकार, यह शोध प्रबंध न केवल ओशो की शिक्षा दृष्टि को प्रस्तुत करता है, बल्कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली की सीमाओं और सुधार की संभावनाओं की भी चर्चा करता है।
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