प्रेम चाँद और उनका युग | Premchand Aur Unka Yug

By: रामविलास शर्मा - Ramvilas Sharma
प्रेम चाँद और उनका युग | Premchand Aur Unka Yug by


दो शब्द :

इस पाठ में प्रेमचंद और उनके साहित्य का विश्लेषण किया गया है। लेखक डॉ. रामविलास शर्मा ने प्रेमचंद की रचनाओं, उनकी सामाजिक और राजनीतिक धाराओं, और उनके साहित्यिक योगदान पर चर्चा की है। पाठ में यह बताया गया है कि प्रेमचंद का साहित्य केवल हिंदी भाषा में नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी व्यापक रूप से पढ़ा और सराहा गया है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि प्रेमचंद की कृतियों में किसानों और आम जनता की वास्तविकता का चित्रण होता है, लेकिन कुछ आलोचकों का मानना है कि भावनाओं की गहराई में वे अन्य लेखकों की तुलना में पीछे रह गए हैं। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कम किया गया है। लेखक ने यह संकेत किया है कि प्रेमचंद का साहित्य समाजवाद और जनक्रांति के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि साहित्य का स्रोत जनता है, और महान साहित्य की रचना जनता से जुड़कर ही संभव है। प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से साम्राज्यवाद और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई, और उनके विचार आज भी आधुनिक साहित्यकारों के लिए प्रासंगिक हैं। इस पाठ में अंततः प्रेमचंद की रचनाओं को एक गहरी सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका साहित्य केवल एक काल्पनिक कथा नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है।


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