बीजक | Beejak by


दो शब्द :

यह पाठ कबीर साहेब के जीवन और उनके विचारों की महत्ता के बारे में है। कबीर का जन्म विक्रम संवत 1455 में हुआ और वे एक अद्वितीय संत कवि थे, जिन्होंने धार्मिक पाखंड, जातीय भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। उनका जीवन और विचार मानवता के उद्धार के लिए थे। कबीर का पालन-पोषण नीरू और नीमा नामक जुलाहे दंपती ने किया। उनके माता-पिता का पता नहीं चलता, जिससे उनके जीवन में चमत्कारी तत्व जोड़े गए हैं। कबीर ने अपने को जुलाहा कहकर भी व्यक्त किया, जो उनकी विनम्रता और आत्म-सम्मान को दर्शाता है। उनकी वाणियों में सत्य की खोज और मानवता के प्रति प्रेम की गहराई झलकती है। कबीर ने किसी भी प्रकार के असत्य और पाखंड के साथ समझौता नहीं किया और अपने विचारों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। उनकी दृष्टि में सत्य सर्वोपरि था और उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलकर मानवता की भलाई के लिए प्रयास किए। इस प्रकार, कबीर का जीवन और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें सत्य, प्रेम और मानवता का मार्ग दिखाते हैं।


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