हिंदी महाभारत | Hindi Mahabharat

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: कर्णपर्व - Karna Parv
- पृष्ठ : 364
- साइज: 22 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: इस पाठ में राजा धृतराष्ट्र के शोक का वर्णन किया गया है, जो अपने पुत्र कर्ण की मृत्यु की खबर सुनकर अत्यंत दुखी हो जाते हैं। वे शोक के सागर में डूब जाते हैं और उनकी स्थिति देखकर अन्य महिलाएँ भी विलाप करने लगती हैं। धृतराष्ट्र को उनके मित्र विदुर सांत्वना देने आते हैं, और धीरे-धीरे उनकी चेतना लौटती है। धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन के बारे में पूछते हैं कि क्या वह भी मारा गया है। इस पर विदुर उन्हें बताते हैं कि दुर्योधन और अन्य कौरव योद्धा भी युद्ध में मारे गए हैं। पाठ में युद्ध के दौरान मारे गए विभिन्न योद्धाओं का भी वर्णन किया गया है, जिसमें भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण और अन्य वीरों की मृत्यु का उल्लेख है। राजा धृतराष्ट्र युद्ध में अपने पुत्रों की हार और मृत्यु के कारण गहरे दुख में डूबे रहते हैं और अपनी स्थिति को लेकर चिंतन करते हैं। वे समझते हैं कि उनके पुत्रों का यह दुर्भाग्य उनके अपने कर्मों का परिणाम है, क्योंकि वे पाण्डवों के हिस्से पर अनधिकृत रूप से अधिकार करना चाहते थे। अंततः, पाठ में यह संदेश स्पष्ट होता है कि अधर्म और अन्याय का फल हमेशा दुखदायी होता है और युद्ध की विभीषिका से कोई भी अछूता नहीं रह सकता।
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