निघण्टु भाषा | Nighntu Bhasha

By: पंडित शक्रिधर शर्मा - Pt. Shakridhar Sharma


दो शब्द :

इस पाठ का शीर्षक "मृमिका" है, जिसमें "निघण्टुसाषा" नामक पुस्तक का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक अद्वितीय और अनुपम है, जो सर्वसाधारण और राजवैद्य महाशयों के लिए सहायक है। लेखक ने कहा है कि यह पुस्तक बहुत सारे विषयों को समाहित करती है और इसके माध्यम से विभिन्न औषधियों के नाम, गुण, और उपयोग की जानकारी सरल भाषा में प्रदान की गई है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि निघण्टु की जानकारी के बिना चिकित्सक, व्याकरणज्ञ और अभ्यास के बिना तीरंदाज़ के समान होते हैं, जो हंसी का कारण बनते हैं। औषधियों के नाम, रूप, और गुणों का ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि बिना इस ज्ञान के औषधियां हानिकारक हो सकती हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि जो चिकित्सक औषधियों के गुणों और उनके प्रयोग के सही ज्ञान के साथ कार्य करते हैं, उन्हें उत्तम वैद्य माना जाता है। पाठ में संस्कृत से हिंदी में अनुवाद का प्रयास किया गया है ताकि आम लोग भी इसे समझ सकें। अंत में, लेखक ने इस नई पुस्तक को स्वीकार करने के लिए आग्रह किया है और इसे विद्या के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बताया है, जिससे सभी वर्ग के लोग लाभान्वित हो सकें। पाठ में औषधियों की सूची भी दी गई है, जो विभिन्न प्रकार की औषधियों के नाम और उनके गुणों को दर्शाती है।


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