गोली | Goli

- श्रेणी: Crime,Law and Governance | अपराध ,कानून और शासन नाटक/ Drama
- लेखक: आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri
- पृष्ठ : 296
- साइज: 10 MB
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दो शब्द :
यह पाठ चारणों और राजपूतों के बीच के संबंधों, समर्पण और वीरता की एक कहानी प्रस्तुत करता है। इसमें ठाकुर साहब का वर्णन है, जो संस्कृत और कविता के प्रति रुचि रखते हैं। उनकी प्रतिष्ठा चारणों की उपस्थिति में और भी बढ़ जाती है, जो उनकी वीरता का जश्न मनाते हैं। चारणों का समाज उस समय काफी सम्मानित था, और ठाकुर साहब ने एक प्रसिद्ध चारण कवि के प्रति अपनी सेवा का प्रदर्शन किया। कहानी में एक चारण कवि, करणीदास, की महत्ता का भी उल्लेख है, जो राजाओं के यश का बखान करते थे। ठाकुर साहब ने करणीदास की सेवा की, लेकिन जब चारण ने कहा कि वह केवल तब उनकी वीरता का गान करेगा जब ठाकुर युद्ध में वीरता दिखाएंगे, तब ठाकुर को अपने जीवन में युद्ध का अवसर नहीं मिला। बाद में, जब ठाकुर साहब ने मराठों से युद्ध किया और वीरता दिखाई, तो चारण की पत्नी ने उनकी वीरता का गान किया, जिससे ठाकुर की कीर्ति अमर हो गई। पाठ में एक अन्य पात्र, कुंवरानी, का भी वर्णन है, जो ठाकुर की बेटी है। वह अपने जीवन में सीमाओं का अनुभव करती है, लेकिन उसकी आत्मीयता और समर्पण की भावना पाठ में स्पष्ट है। इस प्रकार, यह पाठ राजपूतों और चारणों की वीरता, सम्मान, और सामाजिक संरचना को दर्शाता है, जिसमें दान और सेवा का विशेष महत्व है। पाठ के अंत में कुंवरानी की भावनाएँ और उसकी स्थिति के बारे में भी संकेत मिलता है, जो उसे अपने स्थान के प्रति उदासीनता के साथ-साथ आशा भी प्रदान करता है।
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