महाभारत पंचम खण्ड (शांति पर्व) | Mahabharat Pancham Khand (shanti Parva)

By: विभिन्न लेखक - Various Authors


दो शब्द :

इस पाठ में महाभारत के शान्तिपर्व का सारांश प्रस्तुत किया गया है। इसमें युधिष्ठिर और अन्य पात्रों के बीच संवाद, उनके विचार, और धार्मिक एवं नैतिक शिक्षाएं शामिल हैं। कथा की शुरुआत युधिष्ठिर के पास नारद और अन्य महर्षियों के आगमन से होती है, जहां वे कर्ण के शाप के बारे में चर्चा करते हैं। युधिष्ठिर कर्ण को अपने संबंधों और उसके बल के बारे में बताते हैं। कर्ण की वीरता का उल्लेख करते हुए, उसके द्वारा जरासंध को पराजित करने और दुर्योधन के साथ उसकी मित्रता की चर्चा होती है। इसके बाद, युधिष्ठिर की चिंताओं और शापों का विवरण दिया गया है। व्यासजी युधिष्ठिर को धर्म की महत्ता और प्रायश्चित्त की आवश्यकता समझाते हैं। युधिष्ठिर का राज्याभिषेक और उसके बाद के घटनाक्रम का भी वर्णन है, जिसमें वे अपने भाइयों और अन्य लोगों को विभिन्न कार्यों में नियुक्त करते हैं। कथा में भीष्म, श्रीकृष्ण, और युधिष्ठिर के बीच के संवाद से राजधर्म और कर्तव्यों का महत्व उजागर किया गया है। अंत में, युधिष्ठिर और उनके भाइयों के लिए शांति एवं न्याय की स्थापना की दिशा में उनके प्रयासों और विनम्रता का वर्णन किया गया है। इस प्रकार, पाठ में धार्मिक, नैतिक, और सामाजिक शिक्षाएं प्रस्तुत की गई हैं, जो पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।


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